अनुभवों की पाठशाला ने सीखाया है बहुत… जो सीखाया मुझे वो काम आया है बहुत। जी हाँ इन पंक्तियों को चरितार्थ कर रहे हैं झीलों की नगरी उदयपुर के आनंद कुमार डाॅ. जी.पी. सर… । अ से लेकर पीएचडी तक का सफर सरकारी संस्थान से करने के बाद भी आज देश के टाॅप एजूकेटर बन गये हैं, कोई इन्हें रामानुजन कहता है तो कोई कंम्पयुटर से तेज दिमाग…. इनका कहना है किताबें पढ़ कर सिर्फ डिग्री मिल सकती है बच्चांें के दिमाग में काॅन्सेप्ट क्लियर करने के लिए शिक्षण तकनीक आना जरूरी है। उच्च शिक्षा, नेट और आईआईटी की कोचिंग का भारी खर्चा वहन करना मध्यम और निम्न तबके के परिवारों के लिए सिर्फ सपना हुआ करती थी लेकिन अब वे मुफ्त में अपने बच्चों को उच्चस्तरीय पढ़ाई करवा पा रहे हैं इसका श्रेय डाॅ. गजेन्द्र पुरोहित को जाता है इन्होंने जरूरतमंदो के लिए घर बैठे निःशुल्क शिक्षा के द्वार खोल दिए हैं। डिजिटल प्लेटफार्म पर कोचिंग के माध्यम से डाॅ. गजेन्द्र पुरोहित ने दो वर्षों में 10 लाख से ज्यादा विद्याथियों को बिना किसी शुल्क के लाभान्वित किया है इनमें से कई विद्यार्थियों का सरकारी नौकरी, आईआईटी जेम और गेट में चयन हो चुका है। पुरोहित भारत में आॅनलाइन शिक्षा में अग्रणी अनएकेडमी के टाॅप एजूकेटर हैं। सरकारी विद्यालय से पढ़े विद्यार्थी द्वारा आईआईटी की कोचिंग करवाना आमतौर पर असंभव माना जाता है लेकिन गजेन्द्र ने इसे आसान साबित कर दिया है।

उच्च शिक्षा व्यक्ति और देश के विकास की सबसे महती जरूरत है और इसे वही समझ सकता है जो इससे महरूम हो। हर गरीब या मीडिलक्लास बच्चा अपने माता-पिता को मेहनत करता देख यही सोचता है कि वो पढ़-लिख कर कुछ ऐसा दिखाएगा जिससे पूरा परिवार आराम की जिन्दगी बसर कर पाए लेकिन बच्चे के सपने उसी समय दम तोड़ देते हैं जब एक्जाम पास करने के लिए कोचिंग करनी पड़ती है और इसके लिए मोटी फीस की जरूरत होती है … आज हम बात कर रहे हैं एक सामान्य लेकिन असाधारण व्यक्तित्व की जो स्वयं तो अभावों में पले लेकिन आज देश में गरीब बच्चों के गुरू बनकर शिक्षा की ज्योत जला रहे है….
डाॅ. गजेन्द्र पुरोहित जिनकी प्रारम्भिक शिक्षा राजस्थान के आदिवासी बाहुल्य और पिछड़े क्षेत्र प्रतापगढ़ के एक छोटे से गांव में हुई। घर में तीन भाइयों की पढ़ाई और अन्य खर्चो को पूरा करने के लिए कमाने वाले सिर्फ पिताजी सरकारी कर्मचारी के रूप में छोटे से पटवारी पद पर काम करते थे। गजेन्द्र बचपन से शिक्षा के क्षेत्र में काम करना चाहते थे लेकिन प्राइवेट स्कूल में पढ़ा सके इतना पैसा पिताजी के पास नहीं था। सरकारी स्कूल में ही पहली से 12 वीं, साईन्स में ग्रेजुएशन, मास्टर्स और पीएचडी की । सबसे पहले एक प्राईवेट स्कूल में पढ़ाना शुरू किया वहां वेतन था मात्र 2400 रूपये, वेतन कम मिलने से ज्यादा यह बात उन्हें चुभती थी कि सरकारी विद्यालय के बच्चों को अच्छी शिक्षा नहीं मिल पा रही है। गजेन्द्र ने गीतांजली काॅलेज आॅफ इंजिनियरिंग में पढ़ाना शुरू किया, यहां हाॅस्टल के इनजार्च के रूप में भी काम करने लगे ताकि गरीब बच्चों को निःशुल्क ट्यूशन पढ़ा सकें। इसके बाद टेक्नो एनजीआर में असिस्टेंट प्रोफेेसर के रूप में काम करने लगे। सरकारी विश्वविद्यालय में काफी प्रयासों के बाद भी चयन नहीं हुआ और सरकारी शिक्षण तंत्र को देखते हुए खुद ही कुछ करने का निर्णय लिया और डिजिटल प्लेटफार्म को अपना वर्क स्टेशन बनाया।
आॅनलाईन से पकड़ी लाइन – डाॅ. गजेन्द्र ने बताते हैं कि विद्याथियों के लिए घर से बाहर शहर में जाकर रहना और कोचिंग आने-जाने के खर्चे उठाना मुश्किल काम है इस स्थिति को देखते हुए आॅनलाईन मंच पर यू-ट्यूब पर चैनल बनाकर विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरू किया, धीरे – धीरे छात्रों को पढ़ाने का तरीका पसन्द आने लगा और शिक्षा से जुड़ी कर समस्या का समाधान मांगने लगे। कई टीचर्स भी इनके विडियो की मदद से अपने विद्याथियों को पढ़ा रहे हैं। डाॅ. गजेन्द्र बताते हैं ज्यादातर विद्यार्थियों को यह पता ही नहीं है कि आईआईटी में गे्रजुऐशन के बाद भी मास्टर्स में प्रवेश के लिए परीक्षा होती है जिसे कोई भी साईन्स स्नातक दे सकता है।

10 करोड़ मिनट व्यू टाइम – डाॅ. गजेन्द्र का कहना है कि देश और दुनिया में डिजिटल प्लेटफार्म पर पढ़ाने वालों की संख्या काफी है लेकिन ज्यादातर ट्यूटर अंग्रेजी माध्यम या फिर पुराने तरीकों से ही पढ़ाते हैं इस कारण स्टूडेंट्स की रूचि उनमें कम है। शोध के बाद डाॅ. गजेन्द्र ने विद्यार्थियों की जरूरत के अनुरूप छोटी- छोटी कक्षाओं में आसान ट्रिक से उन्हें हिन्दी व अंग्रेजी में पढ़ाना शुरू किया और स्टूडेंट्स के सबसे बड़े डर गणित को केन्द्रित कर अभ्यास शुरू करवाए । हायर मेथेमेटिक्स, जनरल एप्टिट्यूड, बीएससी के बाद आईआईटी जेम, इंजीनियरिंग के बाद आईआईटी गेट, नेट आदि के विषय के 300 से ज्यादा विडियो अपलोड किये जा चुके हैं। इनके दो यूट्यूब चैनल हैं जहां सवा तीन लाख से ज्यादा सब्सक्राइबर और 2 करोड़ से ज्यादा व्यू हैं यहां विषय ये जुड़े कई एपिसोड्स उपलब्ध हैं साथ ही मोटिवेशलन विडियोज भी अपलोड किये गए हैं। अनअकेडमी की ओर से डाॅ. गजेन्द्र को टाॅप एजूकेटर घोषित किया गया है साथ ही बड़ी संख्या में सब्सक्राइबर होने के कारण इन्हें सिल्वर प्ले बटन भी मिला हुआ है। विदेशी जैसे अमेरिका, इंग्लैण्ड, नेपाल, श्रीलंका के विद्यार्थियों के लिए वे अंग्रेजी सबटाइटल रखते हैं। गणित विषय में नेट परीक्षा की तैयारी को लेकर इनकी एक पुस्तक कुछ ही समय में डिजिटल प्लेटफार्म पर आने वाली है।
डाॅ. गजेन्द्र की कहानी हमें कहती है अभाव का प्रभाव आपको किसी चीज से कुछ दिन वंचित कर सकता है अगर आपके मन में किसी लक्ष्य को पाने की उम्मीद जिंदा है तो आप किसी भी तरह मंजिल को पा सकते हैं।